ईशादि नौ उपनिषद (शंकरभाष्य) एक महत्वपूर्ण वेदांत ग्रंथ है, जिसमें शंकराचार्य द्वारा लिखित भाष्य शामिल हैं। ये उपनिषदों की एक श्रृंखला है, जो विशेष रूप से तत्त्वज्ञान और ब्रह्मविद्या के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ईशादि नौ उपनिषद में निम्नलिखित नौ उपनिषद शामिल हैं:
- ईशा उपनिषद
- कठ उपनिषद
- प्रश्न उपनिषद
- मुण्डक उपनिषद
- माण्डूक्य उपनिषद
- तैत्तिरीय उपनिषद
- छांदोग्य उपनिषद
- अयतरीय उपनिषद
- संख्यासार उपनिषद
शंकराचार्य का भाष्य इन उपनिषदों की गहराई से विवेचना करता है और वेदांत दर्शन के सिद्धांतों को स्पष्ट करता है। शंकराचार्य का यह भाष्य निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर देता है:
- आत्मा और ब्रह्मा की एकता: शंकराचार्य उपनिषदों के माध्यम से आत्मा (आत्मा) और ब्रह्मा (ईश्वर) के बीच की एकता को स्पष्ट करते हैं। उनका सिद्धांत है कि आत्मा और ब्रह्मा एक ही हैं और यह मोक्ष की प्राप्ति के लिए आवश्यक है।
- संसार और माया: संसार की अस्थिरता और माया (भ्रामकता) के बारे में चर्चा की जाती है। शंकराचार्य बताते हैं कि संसार और भौतिक वस्तुएं असत्य और माया हैं, जबकि केवल ब्रह्मा ही सत्य है।






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