“श्री दुर्गा सप्तशती” शिवदत्त मिश्र शास्त्री द्वारा लिखित एक प्रमुख धार्मिक और तांत्रिक ग्रंथ है जो माँ दुर्गा की पूजा और स्तुति से संबंधित है। यह पुस्तक दुर्गा सप्तशती, जिसे चंडी पाठ भी कहा जाता है, के विभिन्न अंशों और उनकी गहराई को विस्तार से प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का विवरण:
- दुर्गा सप्तशती का महत्व: “श्री दुर्गा सप्तशती” में माँ दुर्गा की महिमा और उनके स्तोत्र, जो कि कुल 700 श्लोकों (सप्तशती) में संकलित हैं, की विशेष जानकारी दी गई है। यह ग्रंथ माँ दुर्गा की शक्ति, उनकी उपासना के महत्व और उनके चमत्कारिक प्रभावों को वर्णित करता है।
- ग्रंथ की संरचना: पुस्तक में दुर्गा सप्तशती के तीन प्रमुख अध्याय (प्रकट, चंडी, और राजराजेश्वरी) का विस्तृत वर्णन और उनका अर्थ प्रस्तुत किया गया है। इन अध्यायों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की स्तुति, उनके मंत्र और उनके पूजा की विधियाँ शामिल हैं।






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