समराङ्गणसूत्रधार (Samrangana Sutradhar)
लेखक: महाराजाधिराज श्री भोज देव
पुस्तक विवरण (हिंदी में):
समराङ्गणसूत्रधार वास्तुकला और नगर नियोजन पर एक प्राचीन और उत्कृष्ट ग्रंथ है, जिसकी रचना परमार वंश के महान राजा महाराजाधिराज श्री भोज देव ने की थी। यह ग्रंथ भारतीय वास्तुकला, नगर योजना, भवन निर्माण और स्थापत्य कला के अद्वितीय ज्ञान का संग्रह है। इसमें प्राचीन भारत में भवन निर्माण के सिद्धांतों, स्थापत्य की विभिन्न शैलियों, और नगरों के निर्माण के वैज्ञानिक और धार्मिक पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है।
इस ग्रंथ में लगभग सभी प्रकार के निर्माण कार्यों, जैसे कि मंदिर, महल, आवासीय भवन, जलाशय, किले, और मूर्तिकला, के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। समराङ्गणसूत्रधार में न केवल वास्तुकला के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है, बल्कि निर्माण कार्यों के दौरान ध्यान रखने योग्य ज्योतिषीय और धार्मिक कारकों का भी उल्लेख किया गया है।
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