भक्तिरस के साधक तत्त्व (२० सोपानों में श्रद्धा, प्रीति तथा प्रेम के स्वरुप, अर्थ एवं फल आदि पर प्रामाणिक लेख)
लेखक: शरच्चंद्र द्विवेदी
विवरण:
“भक्तिरस के साधक तत्त्व” शरच्चंद्र द्विवेदी द्वारा रचित एक गहन और प्रामाणिक ग्रंथ है, जो भक्ति और भक्तिरस के विभिन्न आयामों पर केंद्रित है। इस पुस्तक में २० सोपानों में श्रद्धा, प्रीति, और प्रेम के स्वरूप, उनके अर्थ, और उनके फलों का विस्तृत वर्णन किया गया है। लेखक ने भक्ति के विभिन्न तत्त्वों को एक साधक के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक को भक्ति के मार्ग की गहराइयों को समझने में सहायता मिलती है।
इस ग्रंथ में भक्ति की साधना के विभिन्न चरणों और उनके लाभों का विस्तार से विवेचन किया गया है। श्रद्धा से प्रारंभ होकर प्रीति और प्रेम के उच्चतम सोपानों तक की यात्रा को सरल और सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भक्ति की मौलिकता, उसके आध्यात्मिक और मानसिक प्रभावों का भी विश्लेषण मिलता है।






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