श्रीचक्रनिरुपणम् (Shri Chakra Nirupan) गोस्वामी प्रह्लाद गिरी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण तांत्रिक और धार्मिक ग्रंथ है, जो श्रीचक्र और श्रीविद्या की पूजा और साधना के गूढ़ रहस्यों पर केंद्रित है। यह पुस्तक विशेष रूप से श्रीचक्र के तत्त्व, उसकी संरचना, और श्रीविद्या के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए रची गई है।
श्रीचक्रनिरुपणम् में श्रीचक्र, जिसे कालचक्र या श्रीयंत्र भी कहा जाता है, के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। श्रीचक्र तंत्रशास्त्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण यंत्र है, जो देवी त्रिपुरा सुंदरी के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ग्रंथ में श्रीचक्र के विभिन्न कोणों, उसके धार्मिक और तांत्रिक महत्व, और उसकी पूजा विधियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक में श्रीविद्या के सिद्धांतों, श्रीचक्र की पूजा के विधियों, और तांत्रिक अनुष्ठानों का विस्तृत विवरण है। इसमें श्रीचक्र के विभिन्न पटल, उसके घटक तत्व, और उसकी साधना के सही तरीके पर भी प्रकाश डाला गया है। गोस्वामी प्रह्लाद गिरी ने इस ग्रंथ के माध्यम से श्रीचक्र और श्रीविद्या के रहस्यों को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे यह पुस्तक विद्वानों और साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाती है।






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