“Sanskrit Dhatu Kosa (Traibhasika)” पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र शास्त्री द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो संस्कृत धातुओं का त्रिभाषिक कोश (संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी) है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा के धातुओं के व्यापक और विस्तृत अर्थों को प्रस्तुत करता है।
इस ग्रंथ में प्रत्येक धातु के संस्कृत रूप, हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ, गणवाचक अक्षर, पदवाचक अक्षर, और तृतीय पुरुष एकवचन रूप को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। इसके साथ ही, धातु के सभी प्रसिद्ध और वर्तमान प्रचलित अर्थ भी शामिल किए गए हैं। जिन धातुओं के अर्थ विभिन्न उपसर्गों के साथ भिन्न होते हैं, उन्हें उपसर्ग सहित लिखा गया है और उनके सभी भिन्न अर्थों का विवरण दिया गया है।
यह कोश विशेष रूप से छात्रों और संस्कृत भाषा के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है, क्योंकि इसमें न केवल धातुओं के सामान्य रूप बल्कि उनके विविध प्रयोग और रूपांतर भी समाहित हैं। उदाहरण स्वरूप, ‘दा’ धातु के विभिन्न रूप जैसे दीयते, दापयति, और दित्सति आदि का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।






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