समराङ्गणसूत्रधार (भाग-1: वास्तु शास्त्र)
लेखक: एस.के. जुगनू
पुस्तक विवरण (हिंदी में):
समराङ्गणसूत्रधार (भाग-1: वास्तु शास्त्र) एस.के. जुगनू द्वारा लिखित एक विशिष्ट ग्रंथ है जो प्राचीन भारतीय वास्तुकला और नगर नियोजन के विज्ञान पर केंद्रित है। यह पुस्तक प्रसिद्ध समराङ्गणसूत्रधार के पहले भाग का आधुनिक संदर्भ में पुनर्लेखन और विश्लेषण है, जो मूल रूप से परमार वंश के महान राजा महाराजाधिराज भोज देव द्वारा रचित था।
इस पुस्तक में वास्तु शास्त्र के मूल सिद्धांतों, भवन निर्माण की तकनीकों, और स्थापत्य कला के विभिन्न पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। एस.के. जुगनू ने इस ग्रंथ में प्राचीन शास्त्रों में वर्णित निर्माण तकनीकों और सिद्धांतों को सरल और आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया है, जिससे यह पुस्तक आज के पाठकों के लिए भी प्रासंगिक हो जाती है।






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