पतंजलि योग प्रदीपिका (Patanjali Yoga Pradipika) एक महत्वपूर्ण योग ग्रंथ है जिसे पतंजलि महर्षि द्वारा लिखा गया माना जाता है। यह ग्रंथ योग के दर्शन, अभ्यास और सिद्धांतों पर आधारित है। यह ग्रंथ मुख्यतः चार प्रमुख भागों में विभाजित है, जो निम्नलिखित हैं:
- साधना पाद (Sadhana Pada): इसमें योगाभ्यास के विभिन्न प्रकारों, जैसे आसन, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का वर्णन किया गया है। यह भाग विशेष रूप से साधना और योग के अभ्यास पर केंद्रित है।
- विभूतिपाद (Vibhuti Pada): इस भाग में योग के अभ्यास से प्राप्त होने वाली शक्तियों और सिद्धियों का वर्णन किया गया है। यह भाग योगी की आत्मा की शक्ति और उसकी दिव्य क्षमताओं के बारे में बताता है।
- पद्म पाद (Padma Pada): इसमें योग के परिणाम, योग साधना से प्राप्त होने वाले मानसिक और आध्यात्मिक लाभों का विवरण है। यह भाग ध्यान और समाधि की अवस्था की गहराई को समझने में मदद करता है।
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