Natak Lakshana Ratnakosha (नाटक लक्षण रत्न कोश)” by Babulal Sukla Sastri:
“Natak Lakshana Ratnakosha” भारतीय नाट्यशास्त्र और नाट्यकला पर आधारित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। Babulal Sukla Sastri द्वारा लिखित यह पुस्तक भारतीय नाटक और उसकी लक्षणाओं पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करती है।
इस पुस्तक में नाटकों के लक्षण, उनके स्वरूप, और उनकी विशेषताओं का संकलन और विश्लेषण किया गया है। “Ratnakosha” (रत्न कोश) का मतलब है “मूल्यवान संग्रह”, और इस ग्रंथ में नाट्यशास्त्र की विभिन्न महत्वपूर्ण अवधारणाओं और तत्वों को संग्रहित किया गया है।
“Natak Lakshana Ratnakosha” में नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों, नाटकों की संरचना, पात्रों, उनके अभिनय के तरीकों और विभिन्न नाट्य विधाओं का गहराई से अध्ययन किया गया है। यह पुस्तक नाट्यशास्त्र के छात्रों, शोधकर्ताओं और नाट्यकला में रुचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य संसाधन है।
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