जन्मकुण्डली हो-न हो” नामक पुस्तक दिवाकर शास्त्री द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह पुस्तक ज्योतिष विज्ञान और विशेष रूप से जन्मकुण्डली के प्रभाव और महत्त्व पर केंद्रित है। इस पुस्तक में लेखक ने जन्मकुण्डली की वैधता और इसकी आवश्यकता पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं।
पुस्तक में दी गई सामग्री ज्योतिषीय सिद्धांतों के माध्यम से यह बताती है कि जन्मकुण्डली के माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं की पूर्व जानकारी प्राप्त की जा सकती है या नहीं। इसमें वैज्ञानिक और तर्कसंगत दृष्टिकोण से यह विश्लेषण किया गया है कि कैसे जन्मकुण्डली केवल विश्वास का विषय है या इसमें वास्तविकता की कुछ बुनियाद भी है।
दिवाकर शास्त्री ने इस पुस्तक में विभिन्न ज्योतिषीय ग्रंथों और उनके सिद्धांतों का भी संदर्भ दिया है और जन्मकुण्डली की प्रासंगिकता पर विस्तृत विवेचना की है। पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को ज्योतिषीय विद्या और विशेष रूप से जन्मकुण्डली के सत्य और मिथकों के बारे में जागरूक करना है।






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