गणेश जी की उत्पत्ति के बारे में शिवपुराण में बताया गया है. इसके मुताबिक, एक बार माता पार्वती ने स्नान से पहले हल्दी का उबटन लगाया था. इसके बाद उन्होंने उबटन उतारा और उससे एक पुतला बना दिया. फिर उसमें प्राण डाल दिए. इस तरह भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई.
कहा जाता है कि भगवान गणेश का मस्तक कटने से पहले उनका नाम विनायक था. मस्तक कटने के बाद, उन पर हाथी का मस्तक लगाया गया. तब से उन्हें गजानन कहा जाने लगा. बाद में उन्हें गणों का प्रमुख बनाया गया, तो उन्हें गणपति और गणेश कहने लगे.
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि गणेश जी का असली मुख चंद्रमंडल में चला गया. भगवान गणेश गजमुख, गजानन के नाम से जाने जाते हैं, क्योंकि उनका मुख गज यानी हाथी का है.
शास्त्रों के मुताबिक, गणेश जी का विवाह हुआ था. उनकी दो पत्नियां हैं, जिनका नाम रिद्धि और सिद्धि है. इनसे गणेश जी को दो पुत्र और एक पुत्री हैं.
पुत्रों के नाम क्षेम और लाभ हैं.
पुत्री का नाम शुभ है.
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