आयुर्वेदीय पथ्यापथ्य विज्ञान का वर्णन:
आयुर्वेद, जो कि एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है, स्वास्थ्य और बीमारियों के उपचार के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाती है। इसमें पथ्यापथ्य का महत्वपूर्ण स्थान है। पथ्यापथ्य का मतलब है आहार और व्यवहार संबंधी नियम, जिन्हें पालन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, और अपथ्य, जिन्हें त्यागना चाहिए क्योंकि वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
पथ्य (लाभकारी आहार और आचरण):
- सात्त्विक आहार: ताजे फल, सब्जियां, अनाज, दालें, और दूध।
- नियमित भोजन: नियमित समय पर संतुलित और पोषक आहार का सेवन।
- जल का सेवन: पर्याप्त मात्रा में साफ और ताजे पानी का सेवन।
- योग और ध्यान: मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित योग और ध्यान।
- व्यायाम: नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां।
अपथ्य (हानिकारक आहार और आचरण):
- तले और मसालेदार भोजन: अत्यधिक तला हुआ, मसालेदार और भारी भोजन।
- जंक फूड: फास्ट फूड, प्रॉसेस्ड फूड और अत्यधिक मीठे पदार्थ।
- अनियमित भोजन: अनियमित समय पर भोजन करना और ओवरईटिंग।
- नशीले पदार्थ: शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन।
- तनाव और नींद की कमी: अत्यधिक मानसिक तनाव और अपर्याप्त नींद।
आयुर्वेदीय पथ्यापथ्य विज्ञान व्यक्ति के व्यक्तिगत प्रकृति (दोषों) के अनुसार आहार और जीवनशैली की सिफारिशें करता है। यह व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके स्वास्थ्य को संतुलित और सुधारा जाता है।
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