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“तंत्र” (Tantra)

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Abhautik Satta Me Pravesh अभौतिक सत्ता में प्रवेश

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“अभौतिक सत्ता में प्रवेश” में आपको आत्मा की गहराई में ले जाने वाले लेखक अरुण कुमार शर्मा द्वारा एक गहन अन्वेषण मिलेगा। यह पुस्तक चेतना की प्रकृति, सूक्ष्म शरीर और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग को समझाने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती है। हिंदी में लिखी गई यह दीर्घदर्शी पुस्तक अस्तित्व के अबूतपूर्व पहलुओं को समझने में मदद करती है।

आत्मिकता और आध्यात्मिकता के बीच की अंतर को गहनतापूर्वक जांचते हुए, शर्मा व्यक्तिगत और परिवर्तनात्मक स्वभाव के महत्व को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने पाठकों को सूक्ष्म शरीर के अवधारणा में भी ले जाया है, जिसमें चक्र, कुण्डलिनी, और पांच कोशों का विस्तार होता है, जिससे शारीरिक शरीर को घेरने वाले ऊर्जात्मक परतों को गहराई से समझाने में मदद मिलती है।

शर्मा चक्रों के जटिलताओं में खो जाते हैं, जो हमारे होने के विभिन्न पहलुओं पर नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने कुण्डलिनी के महत्व को स्पष्ट किया है, जो समायान और परिवर्तन के लिए असीमित संभावनाओं का धारण करती है। उन्होंने पांच कोशों के विवेचन किया है, जो शारीरिक, ऊर्जात्मक, मानसिक, ज्ञान, और आनंद शरीरों को समाविष्ट करते हैं।

“अभौतिक सत्ता में प्रवेश” स्व-खोज और आध्यात्मिक विकास की यात्रा पर निकलने वाले लोगों के लिए एक मूल्यवान संसाधन है। शर्मा ध्यान तकनीकों और ध्यानात्मक अभ्यासों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जो पाठकों को अपनी आत्मा से जुड़ने और भौतिक दुनिया की सीमाओं को पार करने में सशक्त करता है।

आध्यात्मिक खोज के लिए एक गहन और प्रेरणादायक अन्वेषण, “अभौतिक सत्ता में प्रवेश” स्वाध्याय के लिए एक श्रोता या अनुभवी आत्मा देता है।

Akashcharini आकाशचारिणी

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Awaahanआवाहन

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Janm Janmantar

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Kaal Paatra

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Kaalanjayi

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Krishnam

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Kundalini Saadhana Prasang

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Kundalini-Shakti कुण्डलिनी-शक्ति

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Maaran Paatra

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Maranpatra मारण पात्र

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Marnottar Jiwan Ka Rahasya मरणोत्तर जीवन का रहस्य

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Mritatmao se sampark (मृतात्माओं से संपर्क)

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Parlok Vigyan परलोक-विज्ञान

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Rahasya

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Teesara Netra – Part 1(तीसरा नेत्र प्रथम खण्ड)

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तीसरा नेत्र – भाग 1″ (Teesra Netra – Part 1) अरुण कुमार शर्मा द्वारा लिखी गई एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो रहस्यमय और आध्यात्मिक विषयों पर केंद्रित है। यह पुस्तक विशेष रूप से आत्मिक दृष्टिकोण और उच्च ज्ञान प्राप्त करने के प्रयास पर ध्यान केंद्रित करती है।

Teesara Netra – Part 2(तीसरा नेत्र द्वितीय खण्ड)

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‘तीसरा नेत्र” का द्वितीय खण्ड आपके समक्ष प्रस्तुत है। इस ‘खण्ड’ के विषयों को संकलित करने में विशेष रूप से किसी प्रकार की समस्या उपस्थित नहीं हुई। लेकिन संकलन काल में अनेक प्रकार की जिज्ञासाओं का उदय अवश्य हुआ हृदय में। पिताश्री अरुण कुमार जी शर्मा द्वारा उन महत्वपूर्ण जिज्ञासाओं का समाधान अति आवश्यक था। इसके लिए सर्वप्रथम मैंने अपनी प्रमुख जिज्ञासाओं की प्रश्न रूप में एक सूची बनाई और उसे पिताश्री के सम्मुख प्रस्तुत की। उन्होंने सूची देखकर कहा- ऐसे नहीं होगा। जिज्ञासा गम्भीर है अपने आपमें। तुम प्रश्न करो, और मैं उसका समुचित उत्तर दूंगा। यह सुनकर प्रसन्नता हुई मुझे | एक दिन अवसर देखकर मैंने पूछा- हिमालय और तिब्बत यात्रा काल में आपने जिन सिद्ध साधकों और सन्‍त-महात्माओं का दर्शन लाभ किया | उनसे आपका साक्षात्कार पूर्वनियोजित था अथवा उसे संयोग मात्र कहा जाएगा ? सब कुछ पूर्व नियोजित होता है | उसके अनुसार जब भौतिक रूप में घटना घटती है तो उसे संयोग कहते हैं | क्या उन महान और दिव्य पुरुषों का अस्तित्व आज भी है?