“वरिवस्यारहस्यम्” (Varivasyarahasyam) डॉ. श्यामाकान्त द्विवेदी ‘आनंद’ द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण तंत्र ग्रंथ है। यह पुस्तक तंत्र विद्या के गहन रहस्यों और साधना विधियों पर केंद्रित है, विशेषकर वरिवस्या परंपरा के संदर्भ में।
पुस्तक की विशेषताएँ:
- वरिवस्या परंपरा का विवेचन: इस ग्रंथ में वरिवस्या तंत्र की परंपरा और इसके गूढ़ सिद्धांतों का विस्तार से विवेचन किया गया है। यह परंपरा देवी की उपासना और साधना के विशेष रूपों पर आधारित है, जिनका गहराई से अध्ययन इस पुस्तक में किया गया है।
- आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टिकोण: पुस्तक में तंत्र के आध्यात्मिक महत्व और तांत्रिक अनुष्ठानों की गहराई से चर्चा की गई है। यह साधकों को वरिवस्या तंत्र के रहस्यों और उनकी साधना में सहायता प्रदान करती है।
- साधना विधियाँ: पुस्तक में वरिवस्या तंत्र की साधना विधियों, मंत्र प्रयोगों, और यंत्रों का विस्तृत वर्णन है। यह साधकों को सही तरीके से तंत्र साधना करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करती है।
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