श्रीविष्णुधर्मोत्तरमहापुराणम् (लेखक: शिवप्रसाद द्विवेदी)
श्रीविष्णुधर्मोत्तरमहापुराणम् एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो हिन्दू धर्म के पुराण साहित्य में अपनी विशेष पहचान रखता है। यह पुराण मुख्य रूप से भगवान विष्णु की महिमा, धर्म के नियम, कला, संस्कृति और जीवन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन करता है। इस ग्रंथ को तीन खंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें धर्म, कला, और ज्ञान-विज्ञान से संबंधित विषयों का गहन विवेचन किया गया है।
इस पुराण के प्रथम खंड में धर्म और नीति से जुड़े विषयों को, दूसरे खंड में चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नाटक, और नृत्य के सिद्धांतों को, और तीसरे खंड में वास्तुकला, आयुर्वेद और ज्योतिष जैसे विज्ञानों को विस्तार से समझाया गया है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
शिवप्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित इस संस्करण में संस्कृत पाठ के साथ हिंदी अनुवाद और सरल व्याख्या दी गई है, जो इसे आम पाठकों और विद्वानों के लिए समझने में सहज बनाता है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो भारतीय धार्मिक ग्रंथों और संस्कृति में गहरी रुचि रखते हैं।






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