श्रीप्रपञ्चसारतन्त्रम् रामचंद्र पुरी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो भारतीय तंत्र परंपरा और दर्शन का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस ग्रंथ में तंत्र के गूढ़ सिद्धांतों और साधनाओं का वर्णन किया गया है, जो साधकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
श्रीप्रपञ्चसारतन्त्रम् में सृष्टि के रहस्यों, ऊर्जा की प्रकृति, और चेतना के विभिन्न स्तरों पर विचार किया गया है। यह ग्रंथ तांत्रिक साधनाओं, मंत्रों, यंत्रों, और पूजा पद्धतियों का विस्तार से वर्णन करता है, जो साधकों को आत्मज्ञान और आध्यात्मिक उत्थान की ओर ले जाने में सहायक होते हैं।
रामचंद्र पुरी ने इस ग्रंथ में प्राचीन तांत्रिक ज्ञान को सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे यह साधकों के लिए एक अमूल्य साधन बन जाता है। यह ग्रंथ न केवल तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों के लिए बल्कि उन सभी के लिए भी उपयोगी है, जो भारतीय आध्यात्मिकता और दर्शन के गूढ़ पहलुओं को समझना चाहते हैं।






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