श्रीभविष्यमहापुराणम् (तीन खंडों का सेट) एस. एन. खंडेलवाल द्वारा एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के गूढ़ रहस्यों को समझाने वाला प्राचीन पुराण है। इस पुस्तक में भविष्यपुराण का विस्तृत वर्णन किया गया है, जो वेदव्यास द्वारा रचित अठारह महापुराणों में से एक है।
भविष्यपुराण में प्रमुख रूप से भविष्य की घटनाओं, धार्मिक अनुष्ठानों, राजवंशों, और विभिन्न युगों की भविष्यवाणियों का वर्णन किया गया है। इसमें धार्मिक कथाओं, पुराणिक चरित्रों और सांस्कृतिक परंपराओं का गहरा अध्ययन किया गया है। तीन खंडों में विभाजित, यह पुस्तक भारतीय धर्म, इतिहास और समाज की विविधताओं को समझने के लिए एक अद्वितीय स्रोत है।
एस. एन. खंडेलवाल ने इस ग्रंथ को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे विद्वानों के साथ-साथ सामान्य पाठकों के लिए भी यह सुलभ हो। उनका उद्देश्य इस प्राचीन ज्ञान को आधुनिक समय में प्रासंगिक बनाना और भारतीय परंपराओं के गहन विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
- विस्तृत परिचय: हर खंड में पुराण की प्रासंगिकता और उसके विभिन्न विषयों का विश्लेषणात्मक परिचय दिया गया है।
- सरल भाषा: पुराण के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
- विविध विषयों का समावेश: धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों का समग्र वर्णन।
- आधुनिक संदर्भ: पुस्तक में आधुनिक समय में पुराणों की प्रासंगिकता और उनके उपयोग पर चर्चा की गई है।






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