श्रीमद्भागवत महापुराणम् (Shri Mad Bhagavata Purana) ब्रह्मानंद त्रिपाठी द्वारा संपादित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे दो खंडों में प्रस्तुत किया गया है। इस संस्करण में श्रीधरि और वंशीधारी नामक दो प्रसिद्ध टीकाओं के साथ इस महापुराण का विश्लेषण और व्याख्या की गई है। श्रीमद्भागवत महापुराण को हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पुराणों में से एक माना जाता है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं, और भक्तिमार्ग के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पुस्तक के मुख्य विषय:
- भगवान श्रीकृष्ण की महिमा: इस पुराण का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का बखान करना है। इसमें उनकी लीलाओं, अवतारों, और भक्तों के प्रति उनकी करुणा और प्रेम का विस्तार से वर्णन किया गया है।
- भक्तिमार्ग का उपदेश: श्रीमद्भागवत महापुराण में भक्तिमार्ग को सर्वोच्च मार्ग माना गया है। इसमें भक्तों को भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण, निष्ठा, और प्रेम का महत्व बताया गया है।
- श्रीधरि और वंशीधारी टीकाएं: इस संस्करण में श्रीधर स्वामी और वंशीधर की टीकाओं का समावेश किया गया है, जो इस पुराण के गूढ़ अर्थों और शिक्षाओं को समझने में सहायक हैं। ये टीकाएं पाठकों को पुराण के प्रत्येक श्लोक का गहन और विस्तृत विश्लेषण प्रदान करती हैं।
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