शरभ तन्त्रम्: पक्षिराज तन्त्रम् (शरभ तंत्रम्: पक्षिराज तंत्रम्) श्री कपिलदेव नारायण द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण तांत्रिक ग्रंथ है, जो विशेष रूप से शरभ और पक्षिराज (गरुड़) देवताओं की पूजा, साधना और उनसे जुड़े तंत्रों पर केंद्रित है। यह ग्रंथ तंत्रशास्त्र के गूढ़ और रहस्यमयी पहलुओं को उजागर करता है, जिसमें शरभ और गरुड़ के दैवीय स्वरूप, उनकी साधना विधियों, और उनसे प्राप्त होने वाले फलों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
शरभ तन्त्रम् में शरभ और गरुड़, दोनों की महिमा और उनके तांत्रिक अनुष्ठानों का विस्तार से वर्णन किया गया है। शरभ, जो कि शिव के उग्र रूप के रूप में जाना जाता है, और गरुड़, जो विष्णु के वाहन और सर्पों के शत्रु के रूप में प्रतिष्ठित हैं, इन दोनों की साधना तंत्रशास्त्र में विशेष महत्व रखती है।
इस पुस्तक में शरभ और गरुड़ की तांत्रिक साधना के विभिन्न विधानों, मंत्रों, और यंत्रों का उल्लेख है। इसमें साधकों के लिए इन देवताओं की कृपा प्राप्त करने के उपाय, अनुष्ठानिक विधियां, और उनसे जुड़े गूढ़ तांत्रिक रहस्यों का विवरण दिया गया है।






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