“षड्दर्शनसंग्रह” आचार्य रुद्रप्रकाश दर्शनकेशरी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो भारतीय दर्शनशास्त्र के छह प्रमुख दर्शनों का संकलन और विवेचन प्रस्तुत करता है। इस ग्रंथ का उद्देश्य पाठकों को भारतीय दार्शनिक परंपरा के विविध पहलुओं से परिचित कराना है।
ग्रंथ की विशेषताएँ:
1. षड्दर्शन का संकलन:
“षड्दर्शनसंग्रह” में भारतीय दर्शन के छह प्रमुख दर्शनों का संकलन किया गया है, जो निम्नलिखित हैं:
न्याय दर्शन: तर्क और ज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित।
वैशेषिक दर्शन: पदार्थ और उसके गुणों पर केंद्रित।
सांख्य दर्शन: सृष्टि के तत्वों और उनके विकास का विश्लेषण।
योग दर्शन: मन और आत्मा की शुद्धि और संयम पर ध्यान।
पूर्व मीमांसा: वेदों के कर्मकांड और अनुष्ठानों का विश्लेषण।
वेदांत दर्शन: आत्मा और परमात्मा के अद्वैतवाद का विवेचन।
2. सरल और सुस्पष्ट भाषा:
आचार्य रुद्रप्रकाश दर्शनकेशरी ने इस ग्रंथ को सरल और सुस्पष्ट भाषा में लिखा है, जिससे यह छात्रों और आम पाठकों दोनों के लिए आसानी से समझने योग्य है।
3. विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण:
इस ग्रंथ में विभिन्न दर्शनों के सिद्धांतों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठकों को इन दर्शनों की मूलभूत अवधारणाओं और उनकी तात्त्विक गहराइयों को समझने में सहायता मिलती है।
4. तुलनात्मक अध्ययन:
“षड्दर्शनसंग्रह” में विभिन्न दर्शनों के सिद्धांतों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है, जिससे पाठक विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं के बीच के अंतर और समानताओं को समझ सकते हैं।
सारांश:
“षड्दर्शनसंग्रह” आचार्य रुद्रप्रकाश दर्शनकेशरी का एक उत्कृष्ट ग्रंथ है, जो भारतीय दर्शनशास्त्र के व्यापक और गहन अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह ग्रंथ न केवल दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए उपयोगी है जो भारतीय दर्शन के विविध और समृद्ध परंपराओं को समझना चाहते हैं। आचार्य रुद्रप्रकाश का यह कार्य भारतीय दर्शनशास्त्र के अध्ययन और अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में प्रतिष्ठित है।
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