पाणिनीय व्याकरण के विद्वान हरी शंकर शास्त्री एक प्रतिष्ठित भाषाविद और संस्कृत विद्वान थे। उन्होंने पाणिनि के व्याकरण पर गहन अध्ययन और शोध किया और इसे व्यापक रूप से प्रचारित किया। हरी शंकर शास्त्री ने पाणिनि के सूत्रों की व्याख्या और उनकी जटिलताओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया, जिससे छात्रों और विद्वानों को इस प्राचीन ग्रंथ को समझने में मदद मिली।
उनका काम न केवल शैक्षिक संस्थानों में मान्यता प्राप्त है, बल्कि उन्होंने भारतीय भाषाओं और व्याकरण के अध्ययन को एक नई दिशा दी है। शास्त्री जी ने अपने लेखों, व्याख्यानों और पुस्तकों के माध्यम से पाणिनीय व्याकरण की महत्ता और उसकी प्रासंगिकता को आधुनिक समय में भी स्पष्ट किया है। उनका योगदान संस्कृत और भारतीय भाषाशास्त्र के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण और सम्माननीय है।
Paniniyam Vyakaranam.Unadi with Paniniya shiksha,Ganapatha,Dhatupatha,Linganushasanam,phitsutra,paribhashapath,prapuritam,chaturvidhalakshyasuchibhi,sutrdhatu.suchibhayam ed. by Hari shankar shastry
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