नाट्यशास्त्रम (भरत मुनि द्वारा निरूपित) (2 खंड) – Manomohan Ghosh द्वारा
विवरण:
नाट्यशास्त्रम भारतीय नाट्य कला का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे भरत मुनि ने लिखा है। इस ग्रंथ को Manomohan Ghosh द्वारा संपादित और प्रस्तुत किया गया है, और यह दो खंडों में उपलब्ध है।
खंड 1: पहले खंड में नाट्यशास्त्र के मूलभूत तत्वों पर प्रकाश डाला गया है। इसमें नाट्यकला की उत्पत्ति, इसके तत्व, और नाट्यशास्त्र के आधारभूत सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन है। नाट्यकला के विभिन्न अंगों जैसे अभिनय, नृत्य, संगीत, और रंगमंच की परिभाषाएँ और विधियाँ इस खंड में शामिल हैं।
खंड 2: दूसरे खंड में नाट्यशास्त्र के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें नाट्यकला के विभिन्न प्रकार, पात्रों की भूमिका, और नाट्यकला के अभ्यास की विधियाँ शामिल हैं। साथ ही, इस खंड में नाट्यशास्त्र के अनुप्रयोग और इसके सांस्कृतिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई है।
विशेषताएँ:
- विस्तृत अध्ययन: Manomohan Ghosh ने नाट्यशास्त्र की सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं और सिद्धांतों को संपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया है।
- साहित्यिक और ऐतिहासिक संदर्भ: ग्रंथ में नाट्यशास्त्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को भी समाहित किया गया है।
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