नाट्यशास्त्र (4 खंड) – Babulal Shukla Sastri द्वारा
विवरण:
नाट्यशास्त्र भारतीय नाट्य कला का एक प्रमुख ग्रंथ है जिसे भरत मुनि ने लिखा। यह ग्रंथ चार खंडों में विभाजित है, और इसमें नाट्यकला के सभी पहलुओं पर गहन चर्चा की गई है। बabulal Shukla Sastri की भूमिका इस ग्रंथ के संस्करण को एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनाती है।
खंड 1: इस खंड में नाट्यशास्त्र की प्रस्तावना, रचनाकार और ग्रंथ की मूल बातें शामिल हैं। इसमें नाट्यकला के मूल तत्वों और उनके अनुप्रयोग की व्याख्या की गई है।
खंड 2: इसमें नाट्यकला के तत्वों का विस्तार से वर्णन है, जैसे कि नाट्यविधि, नृत्य, संगीत और रंगमंच के विभिन्न पहलू।
खंड 3: इस खंड में नाट्यशास्त्र की तकनीकी बातें, जैसे कि अभिनय के विभिन्न प्रकार, पात्रों की भूमिका, और शास्त्रीय नृत्य की विधियाँ शामिल हैं।
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