नरपतिजयचर्यास्वरोदयः (Narapatijayacarya Svarodaya) सतींद्र मिश्रा द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो स्वर, ग्रह, और ज्योतिष के सिद्धांतों का अध्ययन करता है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी है जो स्वर विज्ञान और उसके ज्योतिषीय पहलुओं में रुचि रखते हैं।
पुस्तक के मुख्य बिंदु:
- स्वर का महत्व: नरपतिजयचर्यास्वरोदयः में स्वर विज्ञान के महत्व और उसके ज्योतिषीय प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई है। स्वर, किसी भी व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डाल सकता है और यह पुस्तक इस विषय पर गहराई से प्रकाश डालती है।
- स्वर विज्ञान के सिद्धांत: इस ग्रंथ में स्वर विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों और नियमों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसमें स्वर के प्रभाव, उनके गुण, और उनकी ज्योतिषीय दृष्टि से भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
- ग्रह और स्वर का संबंध: पुस्तक में ग्रहों और स्वर के बीच के संबंध का विश्लेषण किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे विभिन्न ग्रहों की स्थिति और प्रभाव स्वर के माध्यम से व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं।
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