“लकारार्थविवेचनं” डॉ. भारतचंद्र महापात्रा द्वारा लिखा गया एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह संस्कृत व्याकरण के एक विशेष विषय, यानी “लकार” के अर्थ का विश्लेषण करता है।
ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य लकार के विभिन्न अर्थों को समझने और व्याख्या करने में सहायक होना है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में क्रिया रूपों के व्याख्यान को विस्तृत रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे विद्यार्थी और पठक इसे समझने में सहायक होते हैं।
डॉ. भारतचंद्र महापात्रा की आंशिक या संपादनिक योगदान की बात हो तो वे ग्रंथ को स्पष्ट और समझने योग्य ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करते हैं, जिससे पाठकों को ग्रंथ का अध्ययन करने में सहजता मिलती है।
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