“लघुसिद्धान्तकौमुदी” गंगाधर शास्त्री द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण संस्कृत व्याकरण ग्रंथ है। यह ग्रंथ संस्कृत के प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य भट्टोजि दीक्षित की “सिद्धान्तकौमुदी” का संक्षिप्त संस्करण है, जिसे पाणिनीय व्याकरण के नियमों को सरल और सुगम तरीके से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से लिखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ:
संपूर्ण व्याकरण का संक्षिप्त वर्णन: “लघुसिद्धान्तकौमुदी” पाणिनीय व्याकरण के मुख्य नियमों और सिद्धांतों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है, जिससे यह विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ हो जाती है।
सरल भाषा: ग्रंथ की भाषा सरल और स्पष्ट है, जिससे विद्यार्थियों को कठिन व्याकरणीय नियमों को समझने में आसानी होती है।
Of Srimadvaradrajacharya.
Chhatratoshini vyakhyan Samvalita.Sutrana-Vartikanam-Dhatunashcha-Akaradikram Suchikaya Ganpatha sahita.
Vyakhyakar Gangadhar Tiwari
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