बोधसार” श्री पुण्यानंद गिरिजी द्वारा रचित एक उत्कृष्ट आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो आत्मबोध और आत्मज्ञान के विषय में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इस पुस्तक में लेखक ने आत्म-चिंतन, योग, ध्यान, और जीवन के गहरे सत्य को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया है, जिससे साधक और पाठक आत्मज्ञान के मार्ग पर अग्रसर हो सकें।
ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य आत्मा के स्वरूप, संसार के मिथ्या भाव, और ब्रह्मज्ञान को समझाने पर केंद्रित है। इसमें अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को आधार बनाकर जीवन के उच्चतम लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। श्री पुण्यानंद गिरिजी ने विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर अपने अनुभव और ज्ञान को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है, जो साधकों के लिए प्रेरणादायक है।
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