आयुर्वेदिय रोग परीक्षा (Ayurvediya Roga Pariksha) या रोगी परीक्षा आयुर्वेद में रोगी के रोग और रोगी के शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक स्थिति की पहचान करने के लिए की जाती है। इसमें विशेष रूप से निम्नलिखित परीक्षण की जाती है:
1. **दृष्टिपरीक्षा (चारक संहिता से)**: दृष्टि के माध्यम से रोगी के शारीरिक लक्षणों की पहचान की जाती है।
2. **स्पर्शपरीक्षा**: शरीर की स्पर्श से शरीर के स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
3. **प्रश्नपरीक्षा**: रोगी से उसके रोग के बारे में विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं, जिससे उसकी समस्या का सही निदान किया जा सके।
4. **मूत्रपरीक्षा और मलपरीक्षा**: रोगी के मूत्र और मल से उसके विकारों की पहचान की जाती है।
5. **नाडीपरीक्षा**: प्रमुख नाडियों के स्पष्टीकरण के माध्यम से शारीरिक और मानसिक विकृतियों की पहचान की जाती है।
6. **जिह्वापरीक्षा**: जिह्वा के द्वारा शरीर के अंदर की स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
ये सभी परीक्षण रोगी की समस्या का ठीक निदान करने में मदद करते हैं और उसे सही उपचार की दिशा में अग्रसर करते हैं।
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