**अष्टांग हृदय संहिता (Astanga Hridaya Samhita) का विवरण:**
अष्टांग हृदय संहिता एक प्रमुख आयुर्वेदिक ग्रंथ है, जिसकी रचना वाग्भटाचार्य ने की थी। यह ग्रंथ आयुर्वेद के आठ अंगों का संपूर्ण और व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत करता है। इसे आयुर्वेद के तीन प्रमुख ग्रंथों में से एक माना जाता है, जिसमें चरक संहिता और सुश्रुत संहिता भी शामिल हैं।
अष्टांग हृदय संहिता तीन खंडों में विभाजित है:
1. **सुत्रस्थान:** इसमें आयुर्वेद के मूल सिद्धांत, स्वास्थ्य और रोगों के प्रबंधन के उपाय, दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार और आचार का वर्णन है।
2. **शारीरस्थान:** इसमें शरीर की संरचना, गर्भावस्था, प्रसव और शिशु स्वास्थ्य का विवरण है।
3. **निदानस्थान, चिकित्सा स्थान, कल्पस्थान, और उत्तरस्थान:**
– **निदानस्थान:** इसमें विभिन्न रोगों के निदान और लक्षणों का वर्णन है।
– **चिकित्सा स्थान:** इसमें रोगों के उपचार, औषधियों और चिकित्सा पद्धतियों का विस्तृत विवरण है।
– **कल्पस्थान:** इसमें विषों और उनके उपचार का वर्णन है।
– **उत्तरस्थान:** इसमें विभिन्न विशिष्ट चिकित्सा विषयों, जैसे कि शल्य चिकित्सा, स्त्री रोग, बाल रोग आदि का विस्तृत वर्णन है।
अष्टांग हृदय संहिता का उद्देश्य संपूर्ण स्वास्थ्य और रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए व्यावहारिक और सुलभ मार्गदर्शन प्रदान करना है। यह ग्रंथ आयुर्वेद के विद्यार्थियों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी है।
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