पुराणपर्यालोचनम् (Puranaparyalochanam) का प्रथम खंड, जिसे डॉ. कृष्णमणि त्रिपाठी द्वारा लिखा गया है, एक विद्वत्तापूर्ण ग्रंथ है जो भारतीय पुराणों के गहन अध्ययन और विश्लेषण पर आधारित है। यह ग्रंथ उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो भारतीय पुराण साहित्य के व्यापक और गहन अध्ययन में रुचि रखते हैं।
पुस्तक के मुख्य विषय:
- पुराणों का परिचय: इस खंड में भारतीय पुराणों का विस्तृत परिचय दिया गया है। यह पाठकों को पुराण साहित्य के विभिन्न वर्गों, उनकी उत्पत्ति, और उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
- पुराणों का वर्गीकरण और संरचना: पुराण साहित्य को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है और उनकी संरचना कैसी है, इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें महापुराण, उपपुराण, और स्थलीय पुराणों के बीच के अंतर को समझाया गया है।
- पुराणों की कथा सामग्री: इस खंड में पुराणों में वर्णित कथाओं, मिथकों, और उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। यह पुराणों की कहानियों के पीछे के धार्मिक और दार्शनिक अर्थ को समझने में मदद करता है।
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