तिदंतार्णवतारिणी” पंडित धन्वत गोपाल कृष्णाचार्य द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथ है। इस पुस्तक का उद्देश्य संस्कृत भाषा के धातु रूपों का विस्तृत और सटीक विवरण प्रदान करना है, जिससे विद्यार्थी और विद्वान धातु रूपों को सरलता से समझ और प्रयोग कर सकें।
मुख्य बिंदु:
धातु रूपों का विश्लेषण: इस ग्रंथ में संस्कृत भाषा के विभिन्न धातु रूपों का गहन विश्लेषण और व्याख्या की गई है। पंडित गोपाल कृष्णाचार्य ने प्रत्येक धातु के विभिन्न काल और पुरुषों में रूपांतरों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया है।
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